Raja Harishchandra
राजा हरिश्चंद्र - सत्य की कीमत
क्या सत्य इतना महत्वपूर्ण हो सकता है कि उसके लिए एक मनुष्य अपना राज्य, अपना परिवार, अपना सम्मान… यहाँ तक कि स्वयं को भी खो दे?
राजा हरिश्चंद्र की कथा सदियों से सुनाई जाती रही है - एक ऐसे राजा की कथा जिसने सत्य के लिए सब कुछ त्याग दिया।
लेकिन क्या सत्य केवल आदर्श है?
या वह एक ऐसी अग्नि भी है जो धीरे-धीरे मनुष्य को भीतर से जला देती है?
यह पुस्तक किसी देवतुल्य नायक की कहानी नहीं है।
यह एक ऐसे मनुष्य की यात्रा है जो अपने ही निर्णयों की कीमत चुकाते-चुकाते उस बिंदु तक पहुँच जाता है जहाँ सत्य, करुणा, धर्म और मानवता - सब एक-दूसरे से टकराने लगते हैं।
जब एक राजा श्मशान में खड़ा होकर अपने ही पुत्र की देह के सामने नियम निभाता है…
जब एक पिता का हृदय और एक सत्यवादी मनुष्य आमने-सामने खड़े हो जाते हैं…
तब प्रश्न केवल यह नहीं रह जाता कि सत्य क्या है।
प्रश्न यह बन जाता है-
यदि सत्य की कीमत सब कुछ हो…
तो क्या कोई मनुष्य उसे अंत तक निभा सकता है?
"राजा हरिश्चंद्र - सत्य की कीमत" केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलने वाले उस संघर्ष की कहानी है जिसे हर युग अपने अलग रूप में जीता है।
यह पुस्तक आपको उत्तर नहीं देगी।
यह आपको प्रश्नों के साथ अकेला छोड़ देगी।
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राजा हरिश्चंद्र - सत्य की कीमत
क्या सत्य इतना महत्वपूर्ण हो सकता है कि उसके लिए एक मनुष्य अपना राज्य, अपना परिवार, अपना सम्मान… यहाँ तक कि स्वयं को भी खो दे?
राजा हरिश्चंद्र की कथा सदियों से सुनाई जाती रही है - एक ऐसे राजा की कथा जिसने सत्य के लिए सब कुछ त्याग दिया।
लेकिन क्या सत्य केवल आदर्श है?
या वह एक ऐसी अग्नि भी है जो धीरे-धीरे मनुष्य को भीतर से जला देती है?
यह पुस्तक किसी देवतुल्य नायक की कहानी नहीं है।
यह एक ऐसे मनुष्य की यात्रा है जो अपने ही निर्णयों की कीमत चुकाते-चुकाते उस बिंदु तक पहुँच जाता है जहाँ सत्य, करुणा, धर्म और मानवता - सब एक-दूसरे से टकराने लगते हैं।
जब एक राजा श्मशान में खड़ा होकर अपने ही पुत्र की देह के सामने नियम निभाता है…
जब एक पिता का हृदय और एक सत्यवादी मनुष्य आमने-सामने खड़े हो जाते हैं…
तब प्रश्न केवल यह नहीं रह जाता कि सत्य क्या है।
प्रश्न यह बन जाता है-
यदि सत्य की कीमत सब कुछ हो…
तो क्या कोई मनुष्य उसे अंत तक निभा सकता है?
"राजा हरिश्चंद्र - सत्य की कीमत" केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलने वाले उस संघर्ष की कहानी है जिसे हर युग अपने अलग रूप में जीता है।
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राजा हरिश्चंद्र - सत्य की कीमत
क्या सत्य इतना महत्वपूर्ण हो सकता है कि उसके लिए एक मनुष्य अपना राज्य, अपना परिवार, अपना सम्मान… यहाँ तक कि स्वयं को भी खो दे?
राजा हरिश्चंद्र की कथा सदियों से सुनाई जाती रही है - एक ऐसे राजा की कथा जिसने सत्य के लिए सब कुछ त्याग दिया।
लेकिन क्या सत्य केवल आदर्श है?
या वह एक ऐसी अग्नि भी है जो धीरे-धीरे मनुष्य को भीतर से जला देती है?
यह पुस्तक किसी देवतुल्य नायक की कहानी नहीं है।
यह एक ऐसे मनुष्य की यात्रा है जो अपने ही निर्णयों की कीमत चुकाते-चुकाते उस बिंदु तक पहुँच जाता है जहाँ सत्य, करुणा, धर्म और मानवता - सब एक-दूसरे से टकराने लगते हैं।
जब एक राजा श्मशान में खड़ा होकर अपने ही पुत्र की देह के सामने नियम निभाता है…
जब एक पिता का हृदय और एक सत्यवादी मनुष्य आमने-सामने खड़े हो जाते हैं…
तब प्रश्न केवल यह नहीं रह जाता कि सत्य क्या है।
प्रश्न यह बन जाता है-
यदि सत्य की कीमत सब कुछ हो…
तो क्या कोई मनुष्य उसे अंत तक निभा सकता है?
"राजा हरिश्चंद्र - सत्य की कीमत" केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलने वाले उस संघर्ष की कहानी है जिसे हर युग अपने अलग रूप में जीता है।
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