बनारस
यह काव्य संग्रह उस पावन नगरी बनारस की आत्मा से जन्मा है, जो सदियों से साहित्य, संगीत और कला की उर्वर भूमि रही है। बनारस लेखिका की जन्मभूमि है और काशी हिंदू विश्वविद्यालय उनकी ज्ञान-साधना का केंद्र। तत्पश्चात प्रयागराज उनकी कर्मभूमि बनी, जहाँ उन्होंने राजकीय सेवा में अपना जीवन समर्पित किया।
लेखिका - डॉ. सीमा जैन
डॉ. सीमा जैन वर्तमान में दीनदयाल उपाध्याय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सैदाबाद, प्रयागराज में हिंदी विभाग की अध्यक्ष हैं।
एक स्वतंत्र लेखिका के रूप में उनकी लघुकथाएँ, संस्मरण, कविताएँ और वार्ताएँ अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। आकाशवाणी पर भी उनकी वार्ताओं का प्रसारण होता रहा है।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें लेखन के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
लेखन के साथ-साथ वे समाज के निर्धन और वंचित बच्चों की शिक्षा एवं पुनर्वास के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। शिक्षा के क्षेत्र में नवीन शिक्षण पद्धतियों को अपनाकर वे नवाचार को सदैव प्रोत्साहित करती आई हैं।
Product Information
Product Information
Shipping & Returns
Shipping & Returns

बनारस
बनारस
यह काव्य संग्रह उस पावन नगरी बनारस की आत्मा से जन्मा है, जो सदियों से साहित्य, संगीत और कला की उर्वर भूमि रही है। बनारस लेखिका की जन्मभूमि है और काशी हिंदू विश्वविद्यालय उनकी ज्ञान-साधना का केंद्र। तत्पश्चात प्रयागराज उनकी कर्मभूमि बनी, जहाँ उन्होंने राजकीय सेवा में अपना जीवन समर्पित किया।
लेखिका - डॉ. सीमा जैन
डॉ. सीमा जैन वर्तमान में दीनदयाल उपाध्याय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सैदाबाद, प्रयागराज में हिंदी विभाग की अध्यक्ष हैं।
एक स्वतंत्र लेखिका के रूप में उनकी लघुकथाएँ, संस्मरण, कविताएँ और वार्ताएँ अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। आकाशवाणी पर भी उनकी वार्ताओं का प्रसारण होता रहा है।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें लेखन के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
लेखन के साथ-साथ वे समाज के निर्धन और वंचित बच्चों की शिक्षा एवं पुनर्वास के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। शिक्षा के क्षेत्र में नवीन शिक्षण पद्धतियों को अपनाकर वे नवाचार को सदैव प्रोत्साहित करती आई हैं।
Product Information
Product Information
Shipping & Returns
Shipping & Returns
Description
यह काव्य संग्रह उस पावन नगरी बनारस की आत्मा से जन्मा है, जो सदियों से साहित्य, संगीत और कला की उर्वर भूमि रही है। बनारस लेखिका की जन्मभूमि है और काशी हिंदू विश्वविद्यालय उनकी ज्ञान-साधना का केंद्र। तत्पश्चात प्रयागराज उनकी कर्मभूमि बनी, जहाँ उन्होंने राजकीय सेवा में अपना जीवन समर्पित किया।
लेखिका - डॉ. सीमा जैन
डॉ. सीमा जैन वर्तमान में दीनदयाल उपाध्याय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सैदाबाद, प्रयागराज में हिंदी विभाग की अध्यक्ष हैं।
एक स्वतंत्र लेखिका के रूप में उनकी लघुकथाएँ, संस्मरण, कविताएँ और वार्ताएँ अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। आकाशवाणी पर भी उनकी वार्ताओं का प्रसारण होता रहा है।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें लेखन के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
लेखन के साथ-साथ वे समाज के निर्धन और वंचित बच्चों की शिक्षा एवं पुनर्वास के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। शिक्षा के क्षेत्र में नवीन शिक्षण पद्धतियों को अपनाकर वे नवाचार को सदैव प्रोत्साहित करती आई हैं।












